नीमगांव पुलिस की लाईलाज कारगुजारी: थाने की गाड़ी बिना पीयूसी के दौड़ रही सड़कों पर

Fri 13-Mar-2026,11:43 AM IST +05:30

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नीमगांव पुलिस की लाईलाज कारगुजारी: थाने की गाड़ी बिना पीयूसी के दौड़ रही सड़कों पर Neemgaon-Police-Vehicle-Without-Puc
  • नीमगांव थाना की सरकारी गाड़ी पर पीयूसी प्रमाणपत्र न होने का आरोप, आम जनता ने पुलिस की कार्यप्रणाली और नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए।

  • स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस खुद नियमों का पालन नहीं कर रही, ऐसे में आम नागरिकों को यातायात नियमों का पालन करने की सीख कैसे देगी।

Uttar Pradesh / Lakhimpur :

लखीमपुर खीरी/ जिले के नीमगांव थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आम जनता को यातायात नियमों का पालन करने की सलाह देने वाली पुलिस खुद नियमों की अनदेखी करती नजर आ रही है। आरोप है कि नीमगांव थाना की सरकारी गाड़ी, जिस पर SHO लिखा हुआ है, वह बिना पीयूसी (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल) के सड़कों पर चल रही है। इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है।

जानकारी के अनुसार, मोटर वाहन अधिनियम 1988 के तहत सभी वाहनों के लिए पीयूसी प्रमाणपत्र होना अनिवार्य है। यह प्रमाणपत्र वाहन से निकलने वाले धुएं के प्रदूषण स्तर की जांच के बाद जारी किया जाता है। यदि कोई वाहन बिना पीयूसी के सड़कों पर चलता पाया जाता है, तो उसके मालिक पर जुर्माना लगाया जा सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब पुलिस खुद ही नियमों का पालन नहीं कर रही है, तो आम नागरिकों से नियमों के पालन की उम्मीद कैसे की जा सकती है। लोगों का मानना है कि सरकारी विभागों को कानून का पालन करने में सबसे आगे होना चाहिए ताकि जनता में सही संदेश जाए।

इस मामले को लेकर जब जिले के जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इससे लोगों में और भी असंतोष देखने को मिल रहा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या पुलिस विभाग इस मामले में संज्ञान लेकर संबंधित वाहन की पीयूसी जांच करवाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होगी या नहीं।

पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से पीयूसी प्रमाणपत्र बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि वाहन से निकलने वाला धुआं निर्धारित मानकों के भीतर है या नहीं। ऐसे में यदि सरकारी वाहनों में भी नियमों की अनदेखी होती है, तो यह कानून के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।